अयोध्या की यात्रा और राम जन्मभूमि के दर्शन

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अयोध्या की यात्रा और राम जन्मभूमि के दर्शन का विचार बहुत दिनों से मेरे मन में था परंतु व्यस्तता के कारण यात्रा का योग नहीं बन पा रहा था.  इस बार अयोध्या राम मंदिर के दर्शन की इच्छा प्रबल थी। हमारे माता-पिता भी प्रतिवर्ष अयोध्या जी अपने गुरु महाराज से मिलने जाते है जिनका श्यामा सदन आश्रम सरयू नदी के तट से थोड़ी दूरी पर स्थित है। शायद ही भारतवर्ष का कोई व्यक्ति अयोध्या की महत्ता से परिचित ना हो.

इसी समय सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि का मुकदमा अंतिम पड़ाव पर था. इसका फैसला भी जल्द ही आने वाला था तो अयोध्या का मंदिर प्रतिदिन चर्चा में था। इस बार यात्रा की योजना तात्कालिक बनी और इस यात्रा में मै और मेरा एक घनिष्ठ मित्र जिनका नाम अतुल गुप्ता है दो लोग ही तैयार हुए. हम दोनों ने ट्रेन की कन्फर्म टिकट बुक की.  ट्रेन का समय रात के दस बजे के लगभग था जोकि अपने समय से 1 घंटे विलंब से आई. जब लम्बे इंतजार के पश्चात् ट्रेन आती है तो ट्रेन में बैठ कर बड़ी राहत मिलती है. हम सुबह 5:00 बजे के लगभग अयोध्या पहुंचे. फिलहाल इस यात्रा के वर्णन और अनुभवों पर आगे बढ़ने से पहले हम अयोध्या का इतिहास जान लेते है क्योंकि किसी स्थान विशेष की यात्रा करने से पहले हमें उस स्थान के बारे में समुचित जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए.

अयोध्या का इतिहास

अयोध्या का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है इसकी महत्ता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि अयोध्या को सप्तपुरियों में से एक पुरी माना गया है. इस नगरी की स्थापना पुराणों के अनुसार मनु ने की थी. यह प्राचीनकाल से सूर्यवंशियों की राजधानी रहा है. यही पर हमारे प्रभु श्री रामचंद्र जी का जन्म हुआ था. इसके अलावा यह नगरी जैन, बौध्दों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है. यंहा जैन धर्म के पाँच तीर्थंकरों का जन्म हुआ था.

परंतु समय के साथ अयोध्या में भी काफी उथल-पुथल हुई. बाबर के शासन के समय बाबर के जनरल मीर बांकी ने अयोध्या राम जन्म भूमि स्थित राम मंदिर का विध्वंस कर दिया और उसी मंदिर के अवशेषों के ऊपर बाबरी मस्जिद बनवा दी जोकि उसी समय से विवादों में बनी रहीं.

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अयोध्या के दर्शनीय स्थल

अयोध्या में यूँ तो कई बड़े छोटे दर्शनीय मंदिर और स्थल है जिनमे जो प्रमुख है जंहा मै गया था –

नया घाट

अयोध्या स्टेशन पहुंचने के पूर्व ही ट्रैन में हम नित्य कर्म से निर्वत्त हो चुके थे अब सिर्फ स्नान बाकी था जिसके लिए हम सीधे सरयू नदी के नया घाट पहुंचे. यहां पहुंचकर सर्वप्रथम हमने स्नान किया. नया घाट पर उस समय काफी भीड़ थी जोकि तिथि विशेष होने के कारण अपने-अपने पुरखों का श्राद्ध और पिंडदान कर रहे थे. नया घाट हालांकि पक्का बना हुआ है पर उस समय सरयू नदी सीढ़ियों से दूर थी. मौसम अच्छा था धूप नहीं थी आसमान में थोड़ी बदली ही छाई हुई थी.

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अयोध्या का नया घाट

श्यामा सदन आश्रम

स्नान करने के पश्चात हम सीधे अपने पिताजी के गुरु जी के आश्रम श्यामा सदन पहुंचे यहां जैसे ही हम पहुंचे उस समय वहां के मंदिर में आरती हो रही थी यंहा के मंदिर में श्री हनुमान जी की और यंहा के पूर्व गुरु महाराज की मूर्ति स्थापित है. आरती लेने के पश्चात हम लोग गुरु जी से मिले. गुरु जी का जीवन एकदम सादा है और वो पैरों में खड़ाऊं पहनते है साथ ही आश्रम में कई गाय भी पाल रखी है जंहा गुरु महाराज स्वंय गौ सेवा करते है.

आश्रम में हमारे रहने और भोजन की उचित व्यवस्था गुरु जी के आदेशानुसार हो गयी. यंहा का भोजन आपको  एकदम सात्विक मिलता है जिसमें लहसुन और प्याज का अभाव होगा. इसके साथ ही यंहा भोजन दोना पत्तल में परोसा जाता है साथ ही पीने के लिए पानी भी कुल्हड़ में दिया जाता है. जो चीज मुझे यंहा सबसे ज्यादा पसंद आई और यादगार है वो है यंहा का देसी मट्ठा  जो कि यहाँ की गायो के दूध द्वारा तैयार किया जाता है.

हनुमान गढ़ी

हनुमान गढ़ी अयोध्या का एक प्रमुख मंदिर है जंहा हनुमान जी अपने बाल रूप में स्थित है और अपनी माता अंजना की गोद में हैं. हनुमान जी को यंहा का वर्तमान शासक माना जाता है. कहते है जब प्रभु श्री राम ने जल समाधि ली तो उसके पूर्व उन्होंने हनुमान जी को अयोध्या की रक्षा का भार सौंपा. हनुमान जी अयोध्या की सुरक्षा हेतु हनुमान गढ़ी स्थित इस टीले पर ही निवास करने लगे.

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कनक भवन

यह भवन माता कैकयी द्वारा सीताजी को उनके विवाह उपरांत मुंह दिखाई में दिया गया था. इस भवन का कई बार जीर्णोद्धार हुआ है. यह भवन खूबसूरत और विशाल है. यंहा मां सीता, प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जी विराजमान है.

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अयोध्या स्थित कनक भवन Kanak Bhavan

दशरथ महल

यह भवन दशरथ महल के नाम से विख्यात है. यंहा चारों भाईओं राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की पूजा होती है.

राम जन्मभूमि

राम जन्मभूमि जो सबसे ज्यादा सवेंदनशील मुद्दा था उसी का मुकदमा सबसे लंबा चला जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है. हम जब वंहा पहुंचे तो वंहा सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे अपनी सभी वस्तुएं एक काउंटर पर जमा करने के पश्चात हम दर्शनों के लिए पंक्ति में लगे जंहा करीब तीन से चार बार हमे सुरक्षा जांच से होकर गुजरना पड़ा. जब हम रामलला के दर्शन किये तो देखा कि प्रभु वंहा एक छोटे टेंट के नीचे चबूतरे पर विराजमान है. हमने करीब बीस फीट की दूरी से दर्शन किये. वंहा पंडित जी द्वारा प्रसाद मिला जिसको ग्रहण कर हम आगे बढ़े.

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अयोध्या कैसे पहुंचे

रेल मार्ग द्वारा

अयोध्या में अयोध्या स्टेशन है परंतु यंहा का बड़ा स्टेशन जोकि सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है फैजाबाद स्टेशन है. यह स्टेशन अयोध्या से दस किमी दूर है।

सड़क मार्ग द्वारा

सड़क मार्ग से लखनऊ की दूरी तीन घंटे की है. अयोध्या जाते समय हम रेल मार्ग से आये थे लेकिन वापसी हमने सडक मार्ग से की. बस द्वारा सफर करने के लिए आपको अयोध्या से दस किमी का सफर तय करके फैजाबाद आना पड़ेगा क्योंकि यही राज्य परिवहन निगम का बस अड्डा है. यंहा से प्रमुख शहरों के लिए बस उपलब्ध है. वापसी के समय हम अयोध्या हाईवे पर खड़े थे. यंहा से एक टेम्पो ट्रैवलर मिल गया जिसका किराया लखनऊ तक २०० रूपए था. जिसके जरिए हम आराम से तीन घंटे का सफर तय करके लखनऊ पहुँच गये. वंहा से बस द्वारा अपने घर .

अयोध्या के प्रमुख त्योहार

अयोध्या में राम नवमी का त्योहार बहुत ही हर्र्ष उल्लास से मनाया जाता है. इस दिन प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था. इसके साथ ही यंहा दीपावली का त्योहार भी काफी प्रमुखता से मनाया जाता है. इस दिन श्रीराम जी चौदह वर्ष का वनवास समाप्त कर अयोध्या वापस आये थे. इस दिन यंहा के सभी मंदिरों में प्रकाश की सजावट देखते ही बनती है. जब से उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार बनी है तो अयोध्या को पर्यटन स्थल विकसित करने का पुरजोर प्रयास हो रहा है. इसी क्रम में हर दीपावली को कई सालों से सरयू नदी के तट पर हजारों की संख्या में मिटटी के दीयों द्वारा प्रकाश किया जाता है जिसकी छटा देखते ही बनती है.

मेरी इच्छा है कि एक बार दीपावली के त्योहार में मै अयोध्या में रहूँ और वंहा की छटा और आनन्द का अनुभव कर संकू. यंहा मैंने अपने अयोध्या की यात्रा और राम जन्मभूमि के अनुभव और वंहा के उन स्थानों की चर्चा की जंहा मैं स्वंय गया. अगर आपकी अयोध्या के बारे में और अधिक जानने की इच्छा है तो यंहा क्लिक करे.

 

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