प्रवीण झा की पुस्तक भूतों के देश में आइसलैंड की समीक्षा

वैसे तो मैं यात्रा करने का शौकीन हूँ और पढ़ने का भी परन्तु इस कोरोना काल में यात्रा का शौक तो नहीं पूरा हो पा रहा है। हां किताब जरूर पढ़ी जा रही है जिसमें यात्रा वृतांत से संबंधित किताबें प्रमुख है। इसी श्रृंखला में एक किताब मैंने पढ़ी जोकि डॉ प्रवीण कुमार झा द्वारा लिखी गयी है। इसका नाम है “भूतों के देश में आइसलैंड”. आज के चिट्ठे में इसी पुस्तक की समीक्षा है।

लेखक का परिचय

इन्होंने यात्रा वृतान्त से संबंधित किताबें लिखी है जिसका प्रभाव इनकी लेखनी में स्पष्ट दिखाई देता है। डॉ प्रवीण झा एक लेखक, ब्लॉगर और रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर भी है। यह बिहार के दरभंगा में पैदा हुए थे। यह शोध कार्य में भी रुचि रखते है। इनकी एक किताब कुली लाइन्स काफी शोधपरक पुस्तक है। फिलहाल यह नार्वे में कार्यरत है।

भूतों के देश में आइसलैंड पुस्तक

प्रवीण झा, किताब, पुस्तक, यात्रा वर्त्तान्त, किताब समीक्षा, पाठक के विचार, book, book review, travelogue, pravin jha, writer
भूतों के देश में आइसलैंड किताब

यह किताब आपको आइसलैंड की सैर कराती है। आइसलैंड यूरोप का एक छोटा और बर्फीला देश है। यंहा का जीवन काफी जटिल है। यंहा के लोग पुरातन विश्वासों के साथ जीने वाले है साथ ही आज भी ये लोग अपनी पुरानी मातृभाषा का प्रयोग करते है। इस यात्रा मैं हम शुरू से लेकर अंत तक लेखक के साथ आइसलैंड की यात्रा करते है।

इस किताब के माध्यम से हमें इस देश के बारे में काफी अच्छी बातें भी पता चलती है। जैसे यंहा महिलाओं को पुरुष के बराबर दर्जा प्राप्त है और महिलाएं यंहा खुद को सुरक्षित महसूस करती है। यंहा महिलाएं बगैर किसी साथी के अकेले ही सफर करती है और वो भी दूसरे मुसाफिरों की गाड़ी में लिफ्ट द्वारा। यंहा डॉक्टरों की कमी है लेकिन बीमारी भी यंहा कम है। यंहा मात्र छह सरकारी हॉस्पिटल और कुछ सरकारी क्लिनिक है। साथ ही यंहा का मौसम भी बड़ा अनिश्चित है। यंहा हर हफ्ते लगभग 500 बार भूकम्प आते है। लेखक ने बड़े साहस के साथ और विपरीत परिस्थितियों में अपनी यात्रा को जारी रखा।

हर की पौड़ी और ऋषिकेश की यात्रा

ऋषिकेश में योग आश्रम परमार्थ निकेतन की यात्रा

इस किताब के 13 अध्याय है और यह मार्च 2018 में प्रथम बार प्रकाशित हुई।

इस किताब में एक थीम चलती है जो शायद इस देश के मिथकों के अनुकूल है और वो है भूत की खोज। हालांकि लेखक भूत का लाइव साक्षात्कार नहीं प्राप्त कर पाता है और यह खोज चलती रहती है। किताब छोटी है इसमें मात्र 60 पृष्ठ है। इसलिए इसे कम समय में पढ़ा जा सकता है। किताब पढ़ने योग्य है खासकर उनके लिए जो यात्रा वृतांत पढ़ने के शौकीन है। एक कारण यह भी था जिसके कारण मैने इस पुस्तक की समीक्षा की।

इस किताब को आप यंहा से खरीद सकते है।

आप इस किताब का रिव्यू यूटयूब में भी देख सकते है।

जल्द ही अगले चिट्ठे में चर्चा होगी किसी दूसरी किताब के बारे में जो यात्रा वृतांत से संबंधित हो।

Leave a Reply