माता वैष्णों देवी की यात्रा

वैष्णो देवी की यात्रा

चर्चा छिड़ी कि इस बार कहां चला जाए तो मेरे मन में आया कि वैष्णो देवी के दर्शन किए जाए और सभी मित्र सहमत भी हो गए। सही कहते है कि जब माता का बुलावा आता है तभी व्यक्ति माता के दर्शन कर पाता है क्योंकि मुझे वैष्णो देवी गए हुए लगभग आठ साल के ऊपर हो गए थे। कई बार जाने के लिए सोचा पर किसी कारणवश टल जाता था। आज हमारी योजना बनी और कल की तत्काल में ट्रेन की टिकट बुक हो गई। हम तीन लोग थे। मैं, मेरा मित्र आशू साहू और सत्येंद्र साहू। हमारी यात्रा शुरू हुई कानपुर सेंट्रल स्टेशन से। हमारी ट्रेन थी तेजस जोकि भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन है। इस ट्रेन का समय था सुबह ०७ बजकर ३० मिनट पर। हम समय से पहुंच गए।

यात्रा की शुरुआत में ट्रेन अपने निर्धारित समय से चल दी। तेजस ट्रेन में दो क्लास है इकोनॉमी और एक्सक्यूटिव। इकोनॉमी क्लास में हम सफर कर रहे थे। कोच जिस प्रकार फ्लाइट के केबिन बने होते है उसी प्रकार के बने थे। चेयर कार की सुविधा थी। इस ट्रेन के हर कोच में कैमरा लगा हुआ है। दरवाजे ऑटोमैटिक है। बाथरूम भी जैसे फ्लाइट में होते है उसी तर्ज पर बने है।ट्रेन में अवल्ल दर्जे की साफ सफाई थी। पढ़ने के लिए हर चेयर कार में एक अखबार था। पानी की एक बोतल भी दी गई।

सुबह आठ बजे के लगभग हल्का नाश्ता आया जिसमें चाय या कॉफी और बिस्किट थे। इसके बाद बारह बजे के पहले एक बार नाश्ता और आया जिसमें मीठा दही, उपमा, ब्रेड मक्खन था। ट्रेन अपने निर्धारित समय से लगभग १२ बजकर ३० मिनट पर दिल्ली पहुंच गई।

ट्रेन से उतर कर हम अजमेरी गेट की तरफ से निकल कर मेट्रो स्टेशन पहुंचे। जहां से मेट्रो ट्रेन पकड़ कर हम तीसरे साथी सत्येंद्र के पास पहुंचे जो कि दिल्ली में था। नई दिल्ली से कटरा हमारी दूसरी ट्रेन शाम के सात बजकर पांच मिनट पर थी जिसका नाम श्री शक्ति स्पेशल ट्रेन है।

यह ट्रेन अपने नियत समय से चल पड़ी। यह ट्रेन सीधे कटरा स्टेशन तक जाती है जिससे समय और पैसे की बचत होती है वर्ना पहले ट्रेनों का आखिरी स्टेशन जम्मू तवी था उसके बाद टैक्सी द्वारा कटरा पहुंचा जाता था यह ट्रेन नई दिल्ली से चलती है और अंबाला, लुधियाना, जालंधर, पठानकोट, जम्मू तवी, उधमपुर होते हुए कटरा पहुंचती है। इसकी यात्रा अवधि ११ घंटे की है। हमारी टिकट एसी थ्री टियर की थी। ट्रेन अपने निर्धारित समय सुबह ०६ बजकर १० मिनट से पहले ही पहुंच गई। जिस समय ट्रेन पहुंची उस समय उजाला हो रहा था तो हम रास्ते की खूबसूरती का ज्यादा आनंद नहीं ले पाए।

कटरा स्टेशन अत्यंत ही खूबसूरत स्टेशन है। इस स्टेशन का आरंभ 4 जुलाई 2014 को किया गया था। यहां साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह स्टेशन अत्यंत ही मनोरम है।

यहां से त्रिकूट पर्वत का भव्य नजारा दिखाई देता है। स्टेशन अत्यंत ही व्यवस्थित है। यहां वीआईपी लाउंज, प्रतीक्षालय और रेस्टोरेंट है। यहां गाड़ियों की पार्किंग की भी उचित व्यवस्था है।जब हम स्टेशन उतरे तो कुछ देर तक वहां की खूबसूरती देखते रहे उसके बाद थोड़ी देर तक फोटोग्राफी की।

यहां पहले हमारा कोविड-१९ का क्विक एंटीजन टेस्ट हुआ जिसमे हमारी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद हमे आगे जाने दिया गया। रिपोर्ट आने में दस मिनट का समय लगता है। स्टेशन से निकल कर हम होटल की तलाश में निकल पड़े। हमे एक होटल के बारे में एक जानने वाले ने बताया। यह महाशय हर छः माह में दर्शन के लिए आते रहते है। इन्होंने नेशनल होटल के बारे में बताया जो वहां के मार्केट में स्थित है। हम स्टेशन से ऑटो द्वारा नेशनल होटल पहुंचे। वहां के कमरे देखकर कुछ निराशा हुई पर कीमत के अनुसार वाजिब जानकर और ये सोचकर की एक रात ही सोना है वहां रुक गए। कमरे का किराया ६०० रुपया था। कमरे की लोकेशन भी मार्केट के बीच में थी। इसलिए यह और सही लगा हमे। आगे की यात्रा चर्चा अगले चिट्ठे में

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